अपने ही अस्तित्व को खोज रही हैं आजमगढ़ की तमसा नदी

बरसात खत्म होते ही कचरे में गुम होती तमसा, सिस्टम की खुली पोल


आजमगढ़। बरसात का मौसम खत्म होते ही शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली तमसा नदी की असल तस्वीर सामने आ गई है। शहर क्षेत्र के भोला घाट से सामने आई तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि नदी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। पानी की जगह कचरे के ढेर नजर आ रहे हैं, जिससे सफाई अभियान और सरकारी दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

तमसा नदी, जिसे लेकर प्रदेश सरकार द्वारा बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण और सफाई के दावे किए जाते रहे हैं, आज हकीकत में बदहाली का शिकार दिखाई दे रही है। बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने से कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य दिखती है, लेकिन जैसे ही पानी घटता है, नदी की सच्चाई सामने आ जाती है।
भोला घाट की हालिया तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि नदी में हर तरफ कचरे का अंबार लगा हुआ है। प्लास्टिक, घरेलू कचरा और गंदगी के बीच नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह से गायब हो चुका है। हालत यह है कि नदी में सांप जैसे जीव भी दिखाई दे रहे हैं, जो गंदगी और जलभराव की स्थिति को और भयावह बनाते हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा तमसा नदी को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसके विकास और सफाई के लिए बजट स्वीकृत किया गया। साथ ही प्रशासन स्तर पर भी कई बार सफाई अभियान चलाए गए। यहां तक कि जिला प्रशासन को इस कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया गया।
लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई अभियान सिर्फ कागजों और कुछ दिनों की औपचारिकता तक सीमित रह जाता है। नियमित सफाई और कचरा प्रबंधन की ठोस व्यवस्था न होने के कारण नदी की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।


तमसा नदी की यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि शहर की छवि पर भी बड़ा सवाल है। जरूरत है कि प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई और पुरस्कार तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर ठोस और निरंतर कदम उठाए, ताकि तमसा नदी को उसका खोया हुआ अस्तित्व वापस मिल सके।

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