
शासन की रोक के बाद भी 10 शिक्षकों को वेतन भुगतान का आरोप, समाज कल्याण विभाग में खलबली





आजमगढ़।जनपद के समाज कल्याण विभाग में शासकीय धन के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। शासन द्वारा जिन 10 शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाई गई थी, उन्हें कथित रूप से भुगतान किए जाने के आरोप में डीडी समाज कल्याण ने अपने ही विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की पहल की है। इस मामले में पटल सहायक सत्येंद्र बहादुर सिंह और जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी के खिलाफ नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी।
डीडी समाज कल्याण आरके चौहान ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच कराई गई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद विभाग की ओर से दोनों अधिकारियों के खिलाफ नगर कोतवाली में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।
पुलिस ने क्या कहा
मामले को लेकर पुलिस का बयान भी सामने आया है। सीओ सिटी शुभम तोदी ने कहा कि केवल तहरीर देने भर से प्राथमिकी दर्ज नहीं होती। उन्होंने कहा कि मामला “प्रॉपर चैनल” से आना आवश्यक है, उसके बाद ही नियमानुसार एफआईआर दर्ज की जाएगी।
वहीं, नगर कोतवाली प्रभारी यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि अभी तक उनके पास डीडी समाज कल्याण की ओर से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह द्वारा 20 फरवरी को दिए गए प्रार्थना पत्र से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिला समाज कल्याण अधिकारी और उनके पटल सहायक ने शासनादेश के विपरीत नियुक्त किए गए सहायक अध्यापकों को शासन की रोक के बावजूद वेतन भुगतान कर दिया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
शिकायत के बाद विभागीय जांच कराई गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर कार्रवाई की संस्तुति की गई। अब इस मामले को लेकर विभागीय और पुलिस स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। शासन की स्पष्ट रोक के बावजूद भुगतान कैसे हुआ, किस स्तर पर अनुमति दी गई और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही, यह अब जांच का विषय बन गया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
