
विवादित जमीन पर पुलिस की मौजूदगी में मिट्टी डलवाने का आरोप, पीड़िता ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार लगाई



आजमगढ़। जनपद के रौनापार थाना क्षेत्र के खोजौली गांव में विवादित भूमि पर पुलिस की मौजूदगी में जबरन मिट्टी गिरवाकर कब्जा कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।खोजौली गांव निवासी राधिका सिंह ने एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक भूमि से संबंधित विवाद सिविल न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद रौनापार थानाध्यक्ष सुनील कुमार दुबे, एक कांस्टेबल तथा विपक्षी पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे और विवादित भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा कराने का प्रयास किया।
पीड़िता के अनुसार, जब उनके परिवार ने इसका विरोध किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पुत्र के साथ मारपीट की गई और पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। राधिका सिंह का कहना है कि बिना किसी राजस्व विभागीय टीम की मौजूदगी के तीन ट्राली मिट्टी विवादित भूमि पर डलवाई गई।
पीड़िता ने एक कांस्टेबल पर विपक्षी पक्ष से मिलीभगत करने और धन की मांग करने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है। उन्होंने एसपी से संबंधित पुलिसकर्मियों और विपक्षी पक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
थानाध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, रौनापार थानाध्यक्ष सुनील कुमार दुबे ने लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिस भूमि पर मिट्टी डाली गई है, वह न्यायालय में विचाराधीन भूमि का हिस्सा नहीं है। उनके अनुसार, न्यायालय में जो मुकदमा चल रहा है वह पास की दूसरी भूमि को लेकर है और दोनों भूमि का आपस में कोई संबंध नहीं है।
थानाध्यक्ष ने कहा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और पुलिस ने कोई गलत कार्य नहीं किया है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
घटना को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है। एक ओर पीड़िता पुलिस पर मिलीभगत और दबाव बनाने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर पुलिस अधीक्षक स्तर पर होने वाली जांच पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
(नोट: खबर में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित हैं। मामले की सत्यता और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही होगा।
