रोजगार का सपना, युद्ध का सफर और ताबूत में वापसी: रूस से आजमगढ़ पहुंचे अजहरूद्दीन और रामचंद्र के कंकाल, मचा कोहराम

रोजगार का सपना, युद्ध का सफर और ताबूत में वापसी

नौकरी के नाम पर रूस भेजे गए थे युवक, परिजनों ने लगाया युद्ध क्षेत्र में झोंकने का आरोप; दोषी एजेंटों पर कार्रवाई की मांग


आजमगढ़। बेहतर भविष्य और रोजगार की उम्मीद लेकर रूस गए जिले के दो युवकों की जिंदगी आखिरकार ताबूत में लौटकर अपने घर पहुंची। बृहस्पतिवार को जब कंधरापुर क्षेत्र के अजहरूद्दीन खान और रामचंद्र के कंकाल उनके गांव पहुंचे तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। गांव में मातम छा गया और हर आंख नम नजर आई।
परिजनों के अनुसार दोनों युवक कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने के लिए रूस गए थे। आरोप है कि नौकरी का सपना दिखाकर उन्हें विदेश भेजा गया, लेकिन बाद में रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। लंबे इंतजार और सरकारी प्रयासों के बाद उनके अवशेष स्वदेश लाए जा सके।
जनवरी 2024 में गए थे रूस
जानकारी के मुताबिक जनवरी 2024 में आजमगढ़ और मऊ जिले के कई युवक रोजगार के लिए एजेंटों के माध्यम से रूस गए थे। इनमें आजमगढ़ के कन्हैया यादव तथा मऊ जिले के श्यामसुंदर और सुनील यादव की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं राकेश यादव और बृजेश यादव घायल अवस्था में भारत लौट आए थे। कई अन्य युवकों के लंबे समय तक लापता रहने की खबरें भी सामने आई थीं।
नौकरी का झांसा देकर युद्ध में भेजने का आरोप
कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधवपट्टी निवासी योगेंद्र यादव समेत कई युवक इसी समूह का हिस्सा थे। परिजनों का आरोप है कि मऊ जिले के एक एजेंट ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का झांसा देकर युवकों को रूस भेजा और बाद में उन्हें युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिया। 15 जनवरी 2024 को युवकों का यह दल एजेंटों के साथ रूस रवाना हुआ था।
भाई की तलाश में छोड़ दी सऊदी की नौकरी
अजहरूद्दीन के भाई अजीमुद्दीन ने बताया कि भाई की तलाश में उन्होंने अपनी सऊदी अरब की नौकरी तक छोड़ दी। पिछले दो वर्षों से वह भारतीय दूतावास, सरकारी अधिकारियों और रूस में विभिन्न माध्यमों से लगातार संपर्क कर भाई का पता लगाने की कोशिश करते रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार के सहयोग और लंबे प्रयासों के बाद ही भाई के अवशेष भारत लाए जा सके। अजीमुद्दीन ने पूरे मामले को बड़ा स्कैम बताते हुए दोषी एजेंटों और एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का सवाल—रोजगार दिलाने के नाम पर मौत क्यों मिली?
मृतकों के परिवारों का कहना है कि युवकों को बेहतर रोजगार और उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाया गया था, लेकिन उन्हें युद्ध की आग में झोंक दिया गया। इस घटना ने न सिर्फ दो परिवारों के चिराग बुझा दिए, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
ग्रामीणों और परिजनों ने सरकार से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी एजेंटों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अन्य परिवार ऐसे दर्दनाक हादसे का शिकार न हो।
ताबूत पहुंचते ही रो पड़ा गांव
बृहस्पतिवार को जैसे ही दोनों युवकों के अवशेष गांव पहुंचे, परिजनों का दर्द छलक पड़ा। मातम और चीख-पुकार के बीच अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—रोजगार की तलाश में गए इन युवकों को आखिर मौत के मुंह में किसने धकेला?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!